GOOD MORNING
रख हौंसला वो मंज़र भी आयेगा !!
प्यासे के पास चलकर समंदर भी आयेगा !!
थक कर ना बैठ आए मंजिल के मुसाफ़िर !!
मंजिल भी मिलेगी और जीने का मजा भी आयेगा !!
GOOD MORNING
रख हौंसला वो मंज़र भी आयेगा !!
प्यासे के पास चलकर समंदर भी आयेगा !!
थक कर ना बैठ आए मंजिल के मुसाफ़िर !!
मंजिल भी मिलेगी और जीने का मजा भी आयेगा !!
क्या बनाने आए थे, क्या बना बैठे...
कहीं मन्दिर बना बैठे, कहीं मस्जिद बना बैठे..
हम से अच्छी तो जात है परिंदों की...
कभी मन्दिर पे जा बैठे, कभी मस्जिद पे जा बैठे...
हिलते लबो को तो दूनिया जान लेती है..।
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मुझे उस शक्स कि तलाश है
जो मेरी खामोशी जान सके...।।
काश ये मोहब्बत ख्वाब सी होती...
बस आँख खुलती और किस्सा खत्म....
बहुत सुंदर शब्द जो एक मंदिर के दरवाजे के बाहर लिखा था, अगर ठोकरे खाकर भी ना संभले तो मुसाफिर का अपना नसीब वरना पत्थरों ने तो अपना फर्ज निभा ही दिया!
क्या ऐसा नहीं हो सकता की..♡
हम प्यार मांगे..♡
और तुम गले लगा के कहो और कुछ!!