Sunday, 9 November 2014

GOOD MORNING रख हौंसला वो मंज़र भी आयेगा !! प्यासे के पास चलकर समंदर भी आयेगा !! थक कर ना बैठ आए मंजिल के मुसाफ़िर !! मंजिल भी मिलेगी और जीने का मजा भी आयेगा !!

GOOD MORNING
रख हौंसला वो मंज़र भी आयेगा !!
प्यासे के पास चलकर समंदर भी आयेगा !!

थक कर ना बैठ आए मंजिल के मुसाफ़िर !!
मंजिल भी मिलेगी और जीने का मजा भी आयेगा !!

Wednesday, 5 November 2014

I'm back on #Telegram app.

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क्या बनाने आए थे, क्या बना बैठे... कहीं मन्दिर बना बैठे, कहीं मस्जिद बना बैठे.. हम से अच्छी तो जात है परिंदों की... कभी मन्दिर पे जा बैठे, कभी मस्जिद पे जा बैठे...

क्या बनाने आए थे, क्या बना बैठे...
कहीं मन्दिर बना बैठे, कहीं मस्जिद बना बैठे..
हम से अच्छी तो जात है परिंदों की...
कभी मन्दिर पे जा बैठे, कभी मस्जिद पे जा बैठे...

हिलते लबो को तो दूनिया जान लेती है..। . . . . . मुझे उस शक्स कि तलाश है जो मेरी खामोशी जान सके...।।

हिलते लबो को तो दूनिया जान लेती है..।
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मुझे उस शक्स कि तलाश है
जो मेरी खामोशी जान सके...।।

Monday, 3 November 2014

Sunday, 2 November 2014

बहुत सुंदर शब्द जो एक मंदिर के दरवाजे के बाहर लिखा था, अगर ठोकरे खाकर भी ना संभले तो मुसाफिर का अपना नसीब वरना पत्थरों ने तो अपना फर्ज निभा ही दिया!

बहुत सुंदर शब्द जो एक मंदिर के दरवाजे के बाहर लिखा था, अगर ठोकरे खाकर भी ना संभले तो मुसाफिर का अपना नसीब वरना पत्थरों ने तो अपना फर्ज निभा ही दिया!

Saturday, 1 November 2014